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| Comprehension: | | गद्यांश के आधार पर प्रश्न का उत्तर दें।
गांधीजी ने दोनों को – प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर भारतीय अनुभव को पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था| उन्होंने बाह्य को सिर्फ इसलिए नहीं नकारा, कि वह हमारे जीवन का सांसारिक पहलू है, न ही वे अदृश्य से सिर्फ इसलिए सम्मोहित हुए कि उसमें सब-कुछ शाश्वत और पवित्र है, बल्कि उन्होंने समूचे भारतीय यथार्थ को एक अखंडित सत्य की तरह स्वीकार किया| वह हमारे परोक्ष को प्रत्यक्ष से, हमारे विश्वास को व्यवहार में बदलना चाहते थे ताकि हम इतिहास में अपने गौरव और अपनी शर्तों पर जी सकें| वह अपने प्रयास में असफल नहीं हुए, हम ही उनकी संभावनाओं तक पहुँचने में असफल रहे, किन्तु जो विकल्प उन्होंने सुझाया था, वह आज भी उतना जीवित और गौरवपूर्ण है, जितना पहले था| वह भारतीय संस्कृति का स्वप्न है जिससे आज समूची मानव-जाति की नियति जुड़ी है| क्या समय रहते हम उसे चुनने का साहस जुटा पायेंगे? | | | SubQuestion No : 17 | | | Q.17 | गांधीजी ने दोनों को – प्रत्यक्ष को अप्रत्यक्ष से, दृश्य को अदृश्य से, बाह्य को अंतर से जोड़कर किस अनुभव को पूरी समग्रता से जीने का प्रयास किया था? | | |
| Ans | 1. अमेरिकी अनुभव | | 2. भारतीय अनुभव | | 3. विदेशी अनुभव | | 4. यूरोपीय अनुभव |
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